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ट्रंप का 15% ग्लोबल टैरिफ और सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सोमवार को कैसा रहेगा भारतीय शेयर बाजार का हाल?

ट्रंप का 15% ग्लोबल टैरिफ और सुप्रीम कोर्ट का आदेश:    पिछले कुछ दिनों से वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार में ‘अनिश्चितता’ शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में है। इस हलचल के केंद्र में एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप के फैसलों ने न केवल अमेरिकी न्यायपालिका के साथ एक टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापारिक समीकरणों को भी उलझा दिया है।

अगर आप एक आम निवेशक हैं या भारतीय बाजार की दिशा को समझना चाहते हैं, तो आपको इस पूरे घटनाक्रम को बारीकी से समझना होगा। आइए जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है और सोमवार को  जब बाजार खुलेगा, तो आपको क्या उम्मीद रखनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट बनाम ट्रंप: क्या है पूरा विवाद?

पूरे विवाद की जड़ में ‘टैरिफ’ (आयात शुल्क) है। ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर के देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर भारी टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसके लिए उन्होंने ‘आईपा’ (IEEPA) कानून का सहारा लिया था।

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न्यायपालिका का दखल

लगभग 48 घंटे पहले, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप द्वारा लगाए गए इन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट का तर्क था कि राष्ट्रपति के पास इस कानून के तहत इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति नहीं है।

ट्रंप की जिद्द और नया दांव

लोकतंत्र में आमतौर पर कोर्ट के आदेश का सम्मान होता है, लेकिन ट्रंप ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। उन्होंने न केवल कोर्ट के जजों की आलोचना की, बल्कि तुरंत एक दूसरे कानून का सहारा लेकर 15% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान कर दिया। उनका दावा है कि इस नए कानून के तहत उन्हें 150 दिनों तक कोई रोक नहीं सकता।

भारत के लिए क्या बदला? (18% से 15% का गणित)

भारत के नजरिए से यह खबर थोड़ी पेचीदा है। अब तक भारत पर लगभग 18% टैरिफ की तलवार लटक रही थी। जब ट्रंप ने दुनिया के लिए 10% टैरिफ की बात की, तो भारत को लगा कि उसे फायदा होगा। लेकिन फिर ट्रंप ने इसे बढ़ाकर 15% कर दिया।

  • राहत की बात: 18% के मुकाबले 15% का टैरिफ तकनीकी रूप से कम है।

  • चिंता की बात: भारत और अमेरिका के बीच होने वाली महत्वपूर्ण ट्रेड डील (Trade Deal) को फिलहाल ‘रीशेड्यूल’ यानी टाल दिया गया है। भारत सरकार अभी ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की स्थिति में है।

शेयर बाजार पर असर: कल क्या होगा?

कल यानी सोमवार को जब भारतीय शेयर बाजार (NSE और BSE) खुलेंगे, तो निवेशकों की नजरें ट्रंप के इस नए ऐलान पर टिकी होंगी।

गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) के संकेत

गुजरात की गिफ्ट सिटी में चलने वाला ‘गिफ्ट निफ्टी’ अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के मूड को दर्शाता है। शुक्रवार रात को जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था, तब गिफ्ट निफ्टी ने 300 अंकों से ज्यादा की तेजी दिखाई थी। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशकों ने कोर्ट के फैसले को सकारात्मक लिया था।

क्या मंडे को तेजी आएगी?

बाजार के जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से निवेशकों में एक भरोसा जागा है कि ट्रंप की शक्तियों पर लगाम लगाने वाली कोई संस्था मौजूद है। हालांकि, ट्रंप द्वारा 15% टैरिफ को दोबारा लागू करने की खबर गिफ्ट निफ्टी के बंद होने के बाद आई है। इसलिए, कल सुबह का शुरुआती एक घंटा यह तय करेगा कि बाजार ट्रंप की ‘जिद्द’ को तवज्जो देता है या सुप्रीम कोर्ट की ‘लगाम’ को।

सोना-चांदी: डर का पैमाना

एक तरफ शेयर बाजार में अनिश्चितता है, तो दूसरी तरफ सोना और चांदी के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। निवेश की भाषा में सोने को ‘सेफ हेवन’ माना जाता है। जब-जब दुनिया में राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता आती है, लोग अपना पैसा शेयर बाजार से निकालकर सोने में लगाने लगते हैं। सोने के बढ़ते दाम इस बात का संकेत हैं कि बड़ा निवेशक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

आम निवेशक क्या करें? निवेश का सही तरीका

बाजार की इस उठापटक के बीच आम आदमी अक्सर डर जाता है। ऐसे में ‘डायवर्सिफिकेशन’ (Diversification) ही सबसे बड़ा हथियार है।

म्यूचुअल फंड का विकल्प

जो लोग सीधे स्टॉक्स में ट्रेड नहीं कर सकते या जिन्हें मार्केट की बारीकियों की समझ कम है, उनके लिए म्यूचुअल फंड एक बेहतर रास्ता साबित होता रहा है। उदाहरण के तौर पर, कुछ फ्लेक्सी कैप फंड्स ने पिछले 30 सालों में 18% तक का वार्षिक रिटर्न (CAGR) दिया है। यह दर्शाता है कि अगर आप लंबे समय के लिए टिके रहते हैं, तो बाजार की छोटी-मोटी उथल-पुथल आपके पोर्टफोलियो को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाती।

सावधानी के तीन नियम:

  1. जरूरत का पैसा न लगाएं: बच्चों की पढ़ाई, शादी या इमरजेंसी फंड को कभी भी शेयर बाजार में न डालें। केवल वही पैसा निवेश करें जो आप अगले 5-10 साल के लिए छोड़ सकते हैं।

  2. दस्तावेज जरूर पढ़ें: म्यूचुअल फंड हो या कोई और स्कीम, निवेश से पहले ‘ऑफर डॉक्यूमेंट’ को ध्यान से पढ़ें क्योंकि ये बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं।

  3. धैर्य रखें: ट्रंप के बयान आज कुछ हैं, कल कुछ और होंगे। बाजार अंततः कंपनी के प्रदर्शन और देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती पर चलता है।

सोमवार का बाजार एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। ट्रंप का 15% टैरिफ दुनिया के लिए सिरदर्द जरूर है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए यह 18% से घटकर 15% होने जैसी छोटी राहत भी है। भारतीय बाजार में कल शुरुआत सकारात्मक हो सकती है, लेकिन दिनभर की स्थिरता वैश्विक संकेतों और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

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