IBM के शेयरों में 13% की भारी गिरावट: क्या Anthropic का नया AI टूल खत्म कर देगा IBM का साम्राज्य?
टेक्नोलॉजी की दुनिया में सोमवार का दिन एक बड़े उलटफेर का गवाह बना। दिग्गज टेक कंपनी IBM (International Business Machines) के शेयरों में अचानक 13% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे कोई आर्थिक मंदी नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एक नई ‘धमकी’ है। AI स्टार्टअप Anthropic ने एक ऐसा टूल पेश किया है जो IBM के दशकों पुराने बिजनेस मॉडल की नींव हिला सकता है।
सोमवार को बाजार बंद होने तक IBM का शेयर ₹223.35 के स्तर पर आ गिरा। निवेशकों के बीच इस बात का डर है कि Anthropic का नया टूल ‘Claude Code’, IBM के सबसे आकर्षक बिजनेस यानी COBOL आधारित पुराने सिस्टम के आधुनिकीकरण पर कब्जा कर लेगा।
क्या है पूरा मामला? Anthropic के ‘Claude Code’ ने कैसे मचाई खलबली?
IBM दशकों से दुनिया के बड़े बैंकों, एयरलाइंस और सरकारी संस्थानों को अपने मेनफ्रेम सिस्टम बेचता आ रहा है। ये सिस्टम COBOL (Common Business-Oriented Language) नामक एक बहुत पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा पर चलते हैं।
COBOL: दुनिया की बैंकिंग की रीढ़
COBOL भाषा 1950 के दशक के अंत में विकसित की गई थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज भी अमेरिका में लगभग 95% ATM ट्रांजेक्शन इसी पुरानी भाषा के जरिए प्रोसेस होते हैं। पूरी दुनिया में अरबों लाइनों का COBOL कोड आज भी प्रोडक्शन में है।
समस्या और AI का समाधान
समस्या यह है कि इस भाषा को जानने वाले लोग अब कम होते जा रहे हैं। पुरानी कंपनियों के लिए इन सिस्टम्स को अपडेट करना बहुत महंगा और जटिल काम था। IBM इसी जटिलता का फायदा उठाकर अपनी सेवाएं बेचता था। लेकिन Anthropic का दावा है कि उनका नया AI टूल Claude Code इस पुराने और पेचीदा कोड को मिनटों में समझ सकता है, मैप कर सकता है और इसे आधुनिक भाषा में बदल सकता है।
जो काम इंसानी विश्लेषकों को करने में महीनों लगते थे, वह अब AI की मदद से बेहद कम लागत में हो जाएगा। यही वह ‘डर’ है जिसने IBM के निवेशकों को भागने पर मजबूर कर दिया।
IBM के लिए यह ‘AI का खतरा’ इतना बड़ा क्यों है?
IBM के लिए मेनफ्रेम और लीगेसी सिस्टम (पुराने सिस्टम) का आधुनिकीकरण केवल एक सर्विस नहीं, बल्कि कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया है।
1. तकनीकी कर्ज (Technical Debt)
कंपनियां सालों से पुराने सॉफ्टवेयर के भरोसे चल रही हैं। इसे तकनीकी भाषा में ‘टेक्निकल डेट’ कहा जाता है। अब तक इसे ठीक करना इतना महंगा था कि कंपनियां इसे टालती रहती थीं। Anthropic ने कहा है कि AI ने इस गणित को पूरी तरह बदल दिया है। अब पुराने कोड को नया बनाना, उसे चलाने से ज्यादा सस्ता हो गया है।
2. निवेशकों का ‘पहले बेचो, फिर पूछो’ वाला रवैया
शेयर बाजार में फिलहाल AI को लेकर एक अजीब सा डर व्याप्त है। निवेशक किसी भी ऐसी कंपनी से पैसा निकाल रहे हैं जिसे AI से थोड़ा भी खतरा नजर आ रहा है। पिछले शुक्रवार को भी कुछ साइबर सिक्योरिटी कंपनियों के शेयर गिरे थे जब Anthropic ने कोड में कमियां खोजने वाला फीचर लॉन्च किया था। अब IBM उसी का शिकार बनी है।
क्या IBM के लिए यह अंत की शुरुआत है?
भले ही सोमवार को IBM के शेयरों में 24% की साल-दर-साल (Year to Date) गिरावट देखी गई हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि कंपनी इतनी आसानी से हार नहीं मानेगी।
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IBM का अपना AI: IBM खुद अपने ‘Watson’ और अन्य AI मॉडल्स पर काम कर रहा है।
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भरोसा और सुरक्षा: बैंकिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कंपनियां रातों-रात अपना पूरा सिस्टम किसी नए AI स्टार्टअप के भरोसे नहीं छोड़ेंगी।
हालांकि, यह साफ है कि अब IBM को केवल इंसानी डेवलपर्स से नहीं, बल्कि बिजली की रफ्तार से चलने वाले AI मॉडल्स से मुकाबला करना होगा।
एक नए युग की आहट
Anthropic और IBM की यह जंग दर्शाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल चैट करने या फोटो बनाने तक सीमित नहीं है। यह अब उन बुनियादी ढांचों (Infrastructures) में सेंध लगा रहा है जिन पर हमारी वैश्विक अर्थव्यवस्था टिकी है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि क्या IBM इस चुनौती का सामना कर पाएगी या वह ‘AI क्रांति’ की पहली बड़ी बलि (Casualty) बनेगी।



