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क्या अमेरिका में लागू होगी ‘मिलिट्री पावर’? जानें क्यों सीनेट ने ठुकराया वॉर पावर्स रेजोल्यूशन और ट्रंप के लिए इसके क्या हैं मायने।

सीनेट का बड़ा फैसला: क्यों 47 के मुकाबले 53 वोटों से गिर गया 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन'?

मीडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से पीछे हटना नामुमकिन नजर आ रहा है। युद्ध के पांच दिन बीत चुके हैं और इस बीच वाशिंगटन से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। अमेरिकी सीनेट ने उस वॉर पावर्स रेजोल्यूशन (War Powers Resolution) को खारिज कर दिया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया था।

इसका सीधा और आसान मतलब यह है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या भीषण हमले के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की बार-बार इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी। सांसदों के इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन के हाथ खोल दिए हैं, जिससे ईरान के खिलाफ जारी ‘ऑपरेशन’ और अधिक आक्रामक हो सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि अमेरिकी राजनीति के इस दांव-पेच का युद्ध के मैदान पर क्या असर होने वाला है।

वॉर पावर्स रेजोल्यूशन क्या था और क्यों हुआ यह फेल?

अमेरिका में युद्ध से जुड़ी शक्तियों को लेकर हमेशा राष्ट्रपति और संसद के बीच खींचतान रहती है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसका मकसद ट्रंप को ईरान के खिलाफ ‘अघोषित युद्ध’ छेड़ने से रोकना था। इस बिल में मांग की गई थी कि ईरान पर किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति को संसद से औपचारिक अनुमति लेनी अनिवार्य हो।

हालांकि, जब मतदान हुआ तो रिपब्लिकन पार्टी के सांसद एकजुट होकर ट्रंप के पीछे खड़े नजर आए।

  • वोटों का गणित: यह बिल 47 के मुकाबले 53 वोटों से गिर गया।

  • पार्टी लाइन: रिपब्लिकन सीनेटरों ने तर्क दिया कि युद्ध के समय राष्ट्रपति के हाथ बांधना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।

  • अपवाद: केंटकी के रिपब्लिकन रैंड पॉल ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर बिल का समर्थन किया, जबकि पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट जॉन फेटरमैन ने पार्टी लाइन तोड़कर ट्रंप के पक्ष में वोट दिया। शेष मतदान पूरी तरह राजनीतिक ध्रुवीकरण पर आधारित रहा।

सीनेट में तीखी बहस: शांति बनाम ईरान का परमाणु खात्मा

वोटिंग के दौरान अमेरिकी सीनेट में जो बहस हुई, वह इस युद्ध के भविष्य की दिशा तय करती है। डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने रिपब्लिकन सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह वोट यह तय करेगा कि अमेरिका “अंतहीन युद्धों” (Endless Wars) में फंसा रहना चाहता है या शांति का रास्ता अपनाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ मिडिल ईस्ट को एक ऐसी आग में झोंक रहे हैं जिससे निकलना मुश्किल होगा।

दूसरी ओर, रिपब्लिकन नेता जॉन बरासो ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि असली मुद्दा राष्ट्रपति को रोकना नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद करना है। रिपब्लिकन खेमे का मानना है कि ईरान का परमाणु संपन्न होना इजराइल और अमेरिका दोनों के अस्तित्व के लिए खतरा है, इसलिए ट्रंप को निर्णायक कार्रवाई की पूरी छूट मिलनी चाहिए।

“8 हफ्ते तक चल सकता है युद्ध”: रक्षा मंत्रालय की नई चेतावनी

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला बोला था, तब उम्मीद की जा रही थी कि यह कुछ दिनों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ होगी। लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) और कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने की खबरों के बाद ईरान ने भी पलटवार तेज कर दिया है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अब एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध पहले के अनुमानों से कहीं ज्यादा लंबा खिंच सकता है और कम से कम आठ हफ्तों तक जारी रह सकता है। वहीं, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिक इस वक्त भारी जोखिम में हैं। इसी हफ्ते कुवैत में हुए एक संदिग्ध ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत ने अमेरिकी जनता के बीच गुस्से और डर को बढ़ा दिया है।

वॉर पावर्स रेजोल्यूशन गिरने का युद्ध की जमीन पर क्या असर होगा?

इस बिल के खारिज होने का सबसे बड़ा असर कूटनीति पर पड़ेगा। अब ट्रंप प्रशासन को इस बात का डर नहीं है कि घरेलू राजनीति उनके सैन्य अभियानों में बाधा डालेगी।

  1. असीमित सैन्य कार्रवाई: ट्रंप अब ईरान के तेल ठिकानों, परमाणु केंद्रों और सैन्य अड्डों पर बिना किसी देरी के हमले का आदेश दे सकते हैं।

  2. सहयोगियों को संदेश: इजराइल को यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि उसे अमेरिका का पूरा राजनीतिक और सैन्य समर्थन प्राप्त है।

  3. ईरान का रुख: बिल का गिरना ईरान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि अमेरिकी संसद ट्रंप पर लगाम लगाएगी। अब ईरान को और अधिक आक्रामक जवाबी रणनीति बनानी पड़ सकती है।

क्या हम एक महायुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?

अमेरिकी सांसदों का यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत है, लेकिन वैश्विक शांति के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है। वॉर पावर्स रेजोल्यूशन का नामंजूर होना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब ईरान के साथ आर-पार की लड़ाई के मूड में है। जैसे-जैसे युद्ध के दिन बढ़ रहे हैं, तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का संकट भी गहराता जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘आठ हफ्ते’ का यह अनुमान कहीं दशकों पुराने मिडिल ईस्ट संकट को एक नए विश्व युद्ध में तो नहीं बदल देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के खारिज होने से ट्रंप को क्या फायदा मिला?

इस बिल के गिरने से अब राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य ऑपरेशन के लिए संसद की मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। उनके पास सेना का उपयोग करने की स्वतंत्र शक्ति बनी रहेगी।

2. कुवैत में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किसने किया?

कुवैत में हुए ड्रोन हमले की जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर किसी ने नहीं ली है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे ईरान समर्थित गुटों का हाथ हो सकता है। इस हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की जान गई है।

3. युद्ध 8 हफ्तों तक चलने की बात क्यों कही जा रही है?

रक्षा मंत्री के अनुसार, ईरान के सैन्य ढांचे और परमाणु ठिकानों को पूरी तरह निष्क्रिय करने के लिए जितना समय चाहिए, वह पहले के अनुमान से अधिक है। साथ ही ईरान के कड़े प्रतिरोध को देखते हुए समय सीमा बढ़ा दी गई है।

4. क्या इस फैसले से मिडिल ईस्ट के अन्य देश भी प्रभावित होंगे?

जी हां, लेबनान, सीरिया, इराक और कुवैत जैसे देश पहले से ही इसकी चपेट में हैं। युद्ध लंबा खिंचने से पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

टा डिस्क्रिप्शन: अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य शक्ति को सीमित करने वाले वॉर पावर्स रेजोल्यूशन को खारिज कर दिया है। अब ट्रंप ईरान पर हमले के लिए स्वतंत्र हैं। जानें युद्ध के 5वें दिन के बड़े अपडेट्स और सीनेट की वोटिंग का पूरा सच।

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अगला कदम: क्या आप उन 53 सांसदों की सूची देखना चाहते हैं जिन्होंने ट्रंप के समर्थन में वोट किया? या आप ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए ताज़ा हमलों की सैटेलाइट तस्वीरें देखना चाहेंगे?

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