दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ रखने की मांग: बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर क्यों चौंकाया?
सांसद प्रवीण खंडेलवाल की दलील: 'दिल्ली' के बजाय 'इंद्रप्रस्थ' क्यों है जरूरी?

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इस बार वजह प्रदूषण या राजनीति नहीं, बल्कि इसका नाम है। चांदनी चौक से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने एक बड़ी मांग उठाते हुए केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ (Indraprastha) कर दिया जाना चाहिए।
बुधवार को उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र लिखा। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस मांग के पीछे का तर्क क्या है और इसका इतिहास से क्या नाता है।
इंद्रप्रस्थ नाम ही क्यों? खंडेलवाल का तर्क
प्रवीण खंडेलवाल का मानना है कि दिल्ली का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार ‘इंद्रप्रस्थ’ से जुड़ा है। उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली की पहचान सदियों पुरानी है और इसका उल्लेख हमारे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
उनके अनुसार, दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करना केवल एक नाम परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि यह भारत की गौरवशाली विरासत को फिर से स्थापित करने का एक कदम होगा। बीजेपी सांसद का तर्क है कि ‘दिल्ली’ शब्द के पीछे के इतिहास के बजाय ‘इंद्रप्रस्थ’ शब्द भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अधिक मजबूती से प्रतिनिधित्व करता है।
माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी को मैंने पत्र लिखकर दिल्ली का नाम “इंद्रप्रस्थ” करने का अनुरोध किया है।
महाभारत काल में पांडवों द्वारा बसाए गए इंद्रप्रस्थ का उल्लेख हमारी सभ्यतागत स्मृति का हिस्सा है और कई ऐतिहासिक-पुरातात्त्विक संकेत भी दिल्ली क्षेत्र की उसी प्राचीन पहचान की… pic.twitter.com/J2Y44cmGC1
— Praveen Khandelwal (@PKhandelwal_MP) February 25, 2026
क्या है इंद्रप्रस्थ का ऐतिहासिक महत्व?
इतिहास की किताबों और पौराणिक कथाओं की ओर मुड़ें, तो इंद्रप्रस्थ का नाम सबसे पहले महाभारत काल में आता है।
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पांडवों की राजधानी: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इंद्रप्रस्थ वह नगरी थी जिसे पांडवों ने खांडवप्रस्थ के घने जंगलों को साफ करके बसाया था। इसे उस समय की सबसे भव्य और सुंदर नगरी माना जाता था।
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पुराना किला और खुदाई: आधुनिक दिल्ली के ‘पुराने किले’ (Purana Qila) को अक्सर इंद्रप्रस्थ के स्थल के रूप में देखा जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कई खुदाइयों में यहां ऐसे अवशेष मिले हैं जो महाभारत काल के चित्रित धूसर मृदभांड (PGW) संस्कृति से मेल खाते हैं।
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सांस्कृतिक जड़ें: इंद्रप्रस्थ शब्द का अर्थ है ‘इंद्र का शहर’। बीजेपी के कई नेता लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि दिल्ली के मौजूदा स्वरूप पर मुगल और ब्रिटिश काल की गहरी छाप है, जबकि इसकी असल जड़ें प्राचीन हिंदू गौरव में छिपी हैं।
नाम बदलने की प्रक्रिया: कितनी आसान या मुश्किल?
किसी भी केंद्र शासित प्रदेश या शहर का नाम बदलना एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है। अगर दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने के सुझाव पर सरकार गंभीरता से विचार करती है, तो इसके लिए कई चरणों से गुजरना होगा:
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संसद की मंजूरी: दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और देश की राजधानी है। इसके नाम में बदलाव के लिए संसद में संविधान संशोधन या विशेष विधेयक की आवश्यकता पड़ सकती है।
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गृह मंत्रालय की भूमिका: सांसद ने सीधे गृह मंत्री को पत्र लिखा है क्योंकि दिल्ली प्रशासन और इसके नामकरण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं।
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दस्तावेजी बदलाव: अगर नाम बदलता है, तो रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टैंड, सरकारी रिकॉर्ड, आईडी कार्ड और अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों पर इसे अपडेट करना एक बहुत बड़ा और खर्चीला काम होगा।
क्या रही है अब तक की प्रतिक्रिया?
प्रवीण खंडेलवाल की इस मांग पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां बीजेपी के समर्थक इसे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार का ध्यान नाम बदलने के बजाय दिल्ली की बुनियादी समस्याओं जैसे प्रदूषण, ट्रैफिक और सुरक्षा पर होना चाहिए।
आम नागरिक भी इस पर बंटे हुए हैं। युवाओं का एक वर्ग इसे अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मानता है, तो वहीं कुछ लोग इसे प्रशासनिक पेचीदगी और अनावश्यक खर्च के रूप में देख रहे हैं।
क्या दिल्ली बनेगी इंद्रप्रस्थ?
नाम बदलने की यह कवायद फिलहाल एक सुझाव के स्तर पर है। प्रवीण खंडेलवाल का पत्र गृह मंत्रालय पहुंच चुका है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मांग को किस तरह देखती है। क्या आने वाले समय में हम दुनिया के नक्शे पर ‘दिल्ली’ की जगह ‘इंद्रप्रस्थ’ लिखा हुआ देखेंगे? यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इस बहस ने दिल्ली के इतिहास को एक बार फिर लोगों की जुबान पर ला दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. प्रवीण खंडेलवाल कौन हैं और उन्होंने यह मांग क्यों की?
प्रवीण खंडेलवाल दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद हैं। उनका मानना है कि दिल्ली का असली और प्राचीन नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, इसलिए इसका नाम बदला जाना चाहिए।
2. क्या पहले भी दिल्ली का नाम बदलने की मांग उठी है?
हां, समय-समय पर विभिन्न संगठनों और नेताओं द्वारा दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ या ‘हस्तिनापुर’ करने की मांग उठती रही है। हालांकि, यह पहली बार है जब किसी मौजूदा सांसद ने आधिकारिक तौर पर गृह मंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा है।
3. क्या ‘इंद्रप्रस्थ’ और ‘दिल्ली’ एक ही जगह हैं?
इतिहासकारों के अनुसार, आज की आधुनिक दिल्ली कई शहरों (जैसे लाल कोट, सिरी, तुगलकाबाद, शाहजहानाबाद) का मेल है। इंद्रप्रस्थ को इन सबसे पुराना माना जाता है, जिसका केंद्र वर्तमान के पुराने किले के आसपास रहा होगा।
4. शहर का नाम बदलने से आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?
सीधे तौर पर तो काम नहीं रुकते, लेकिन सरकारी दस्तावेजों, पते और पहचान पत्रों को धीरे-धीरे अपडेट करना पड़ता है। साथ ही शहर की ब्रांडिंग और साइनबोर्ड्स बदलने में सरकारी खजाना खर्च होता है।



