एंटरटेनमेंट

Dhurandhar 2-मास्टरपीस या प्रोपेगेंडा? धुरंधर 2 को लेकर न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर छिड़ी वैचारिक जंग।

धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लेकर आई है। जानिए क्यों इस फिल्म को कुछ लोग मास्टरपीस और कुछ पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा कह रहे हैं। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

भारतीय सिनेमा जगत में हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर 2’ (Dhurandhar 2) इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह फिल्म न केवल अपने विशाल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के लिए जानी जा रही है, बल्कि सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर इसे लेकर एक वैचारिक युद्ध (Ideological War) भी छिड़ गया है।  फिल्म ने भारतीय बाजार में 500 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है सबसे तेज 500 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली पहली फिल्म है फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लेकर आई है और ऐसा करने वाली पहली फिल्म है और वो भी तब जब इस फिल्म गल्फ में बैन किया गया है साथ ये ‘A’ Ceritificate  वाली फिल्म है इसके बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तुफान मचा दिया है तो वही वैश्विक स्तर पर (विशेषकर अमेरिका में) हॉलीवुड फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहाँ एक ओर दर्शक इसे ‘मास्टरपीस’ बता रहे हैं, वहीं समीक्षकों का एक वर्ग इसे ‘पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा’ (Political Propaganda) का टैग दे रहा है।

विस्तृत विश्लेषण: धुरंधर 2 की चर्चा और विवाद के पीछे की कहानी

1. फिल्म का प्रभाव और बॉक्स ऑफिस की सुनामी

‘धुरंधर 2’ ने उन सभी पुराने मिथकों को तोड़ दिया है कि केवल बड़े ‘सुपरस्टार्स’ या ‘खांस’ की फिल्में ही ब्लॉकबस्टर हो सकती हैं। फिल्म की सफलता के कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सबसे तेज 100 करोड़: यह फिल्म भारत में सबसे तेजी से 100 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाली शीर्ष फिल्मों में से एक बन गई है।

  • ग्लोबल डोमिनेशन: इसने यूएस बॉक्स ऑफिस पर नंबर वन स्पॉट हासिल किया, जो किसी भी भारतीय फिल्म के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

  • 7.5 घंटे का कंटेंट: फिल्म की कुल अवधि लगभग साढ़े सात घंटे की है, जिसे दो भागों में विभाजित किया गया है। इतने लंबे कंटेंट के बावजूद दर्शकों की व्यस्तता (Engagement) बनी रहना एक बड़ी कलात्मक जीत मानी जा रही है।

2. प्रोपेगेंडा बनाम नजरिया: विवाद की जड़ें

जब भी कोई फिल्म राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति या समाज के किसी कड़वे सच को दिखाती है, तो उस पर ‘प्रोपेगेंडा’ होने का आरोप लगना आम बात है। प्रोपेगेंडा का अर्थ होता है—किसी विशिष्ट राजनीतिक दृष्टिकोण या विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए सूचना का प्रचार करना।

‘धुरंधर 2’ के मामले में विवाद इसलिए है क्योंकि इसमें कुछ कड़े राजनीतिक संदेश दिए गए हैं। फिल्म के निर्देशक (जैसे आदित्य धर) ने पहले भी ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी फिल्मों के माध्यम से अपना एक स्पष्ट स्टैंड रखा है। आलोचकों का मानना है कि फिल्म एक खास विचारधारा को पुख्ता करती है। हालांकि, फिल्म के समर्थकों का तर्क है कि यह केवल कहानी कहने का एक ‘नजरिया’ (Perspective) है। यदि फिल्म हमारी व्यक्तिगत विचारधारा से मेल नहीं खाती, तो हम उसे प्रोपेगेंडा कह देते हैं, जो कि सिनेमाई समझ की कमी को दर्शाता है।

3. बॉलीवुड की पुरानी फिल्मों से तुलना और ‘हिपोक्रेसी’ का तर्क

फिल्म के पक्ष में तर्क देने वाले लोग अक्सर पुरानी फिल्मों के उदाहरण देते हैं जहाँ अलग तरह की विचारधारा दिखाई गई थी, लेकिन तब उन्हें प्रोपेगेंडा नहीं कहा गया। आइए कुछ उदाहरणों से समझते हैं:

  • राजी (Raazi): हरिंदर सिक्का की किताब ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित इस फिल्म में मुख्य किरदार को अंत में रोते हुए और ‘मुझे घर जाना है’ कहते हुए दिखाया गया। लेखक के अनुसार, उनकी किताब में किरदार ऐसा नहीं था। यहाँ एक ‘सॉफ्ट’ नजरिया अपनाया गया लेकिन इसे प्रोपेगेंडा नही कहा गया

  • मिशन कश्मीर और हैदर: इन फिल्मों में आतंकवादियों के अंतर्द्वंद्व (Dilemma) को दिखाया गया। ‘हैदर’ में कुछ दृश्यों में सुरक्षा बलों के चित्रण पर सवाल उठे थे, लेकिन उसे ‘कला’ (Art) माना गया जबकि इसको प्रोपेगेंडा फिल्म नही कहा गया.

  • टाइगर जिंदा है और पठान: इन फिल्मों में अक्सर पड़ोसी देशों के साथ भावनात्मक जुड़ाव या बिना तैयारी के मिशन दिखाए जाते हैं। यहाँ ‘सिनेमाई लिबर्टी’ का सहारा लेकर स्टाइल को लॉजिक पर भारी दिखाया गया।

तुलनात्मक अध्ययन यह बताता है कि दर्शक अब ऐसी फिल्में पसंद कर रहे हैं जो अधिक ‘रॉ’ (Raw) और ‘डायरेक्ट’ (Direct) संदेश देती हैं, जैसे कि ‘एनिमल’ या ‘धुरंधर 2’।

4. क्या सिनेमा कभी पूरी तरह न्यूट्रल (Neutral) हो सकता है?

तकनीकी रूप से, कोई भी रचनात्मक कार्य—चाहे वह पेंटिंग हो, किताब हो या फिल्म—पूरी तरह से ‘न्यूट्रल’ नहीं हो सकता। बनाने वाले का अपना एक विश्वास और अनुभव होता है जो उसकी रचना में झलकता है। ‘धुरंधर 2’ के मामले में भी निर्देशक ने अपनी कहानी को बिना किसी फिल्टर के पेश किया है। जो लोग इसे पसंद कर रहे हैं, वे इसे ‘साहस’ कह रहे हैं, और जो असहमत हैं, वे इसे ‘प्रोपेगेंडा’।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

 

Q1: ‘धुरंधर 2’ को प्रोपेगेंडा क्यों कहा जा रहा है?

उत्तर: फिल्म में दिखाए गए कड़े राजनीतिक संदेश, राष्ट्रवाद की तीव्र भावना और एक विशेष विचारधारा के प्रति झुकाव के कारण समीक्षकों का एक वर्ग इसे प्रोपेगेंडा कह रहा है।

Q2: क्या फिल्म की लंबाई दर्शकों के लिए समस्या बनी?

उत्तर: नहीं, हालांकि फिल्म की फुटेज 7.5 घंटे की है और इसे दो हिस्सों में बांटा गया है, लेकिन बॉक्स ऑफिस के आंकड़े बताते हैं कि दर्शकों ने इसे भरपूर समर्थन दिया है।

Q3: फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कुल कितनी कमाई की है?

उत्तर: फिल्म ने अब तक भारतीय बाजार में 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर लिया है और वैश्विक स्तर पर भी कई रिकॉर्ड तोड़े हैं।

Q4: क्या इस फिल्म में कोई बड़ा सुपरस्टार है?

उत्तर: नहीं, यह फिल्म अपनी मजबूत पटकथा (Script) और विषय वस्तु के दम पर चली है, जो यह साबित करता है कि कंटेंट ही असली राजा है। रणवीर सिंह ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है जिनकी कई सालों से फिल्में नही चल रही थी  ..

 इस खबर से क्या समझें?

किसी फिल्म को केवल इसलिए खारिज कर देना कि वह आपकी सोच से मेल नहीं खाती, कला के साथ अन्याय हो सकता है। वहीं,  अंततः, बॉक्स ऑफिस के आंकड़े और जनता का हुजूम ही यह तय करता है कि फिल्म ने अपना प्रभाव छोड़ा है या नहीं। ‘धुरंधर 2’ ने निश्चित रूप से भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।


क्या आपने धुरंधर 2 देखी है? आपको फिल्म का कौन सा हिस्सा सबसे प्रभावशाली लगा? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं।

Related Articles

Back to top button